ज्ञान, प्रज्ञा, वाक् सिद्धि, संगीत एवं परीक्षा में सफलता प्रदाता माँ सरस्वती मंत्र
“माँ सरस्वती मंत्र को 'विद्या महामंत्र' कहा जाता है। इसके नित्य जप से बुद्धि, एकाग्रता, स्मरण शक्ति और समस्त कलाओं व ज्ञान में सिद्धि प्राप्त होती है।”
माँ सरस्वती ज्ञान, विद्या, संगीत, कला, वाणी और बुद्धि की अधिष्ठात्री देवी हैं। सरस्वती मंत्र का जप विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, लेखकों, कलाकारों और वक्ताओं के लिए वरदान स्वरूप है। यह मंत्र वाणी दोष (जैसे हकलाना या बोलने में झिझक) को दूर करता है और साधक को मधुर, प्रभावशाली व ओजस्वी वाणी प्रदान करता है।
श्वेत/पीले वस्त्र, श्वेत आसन, स्फटिक माला, श्वेत पुष्प (कमल, कुंद, चमेली)
वसंत पंचमी, रोहिणी, मृगशिरा नक्षत्र, गुरुवार एवं प्रातःकाल
अनुष्ठान अनुसार 1,25,000 बार (प्रतिदिन विद्यार्थियों हेतु 1 माला / 108 बार)
माँ सरस्वती को 'वाग्देवी' और 'शारदा' भी कहा जाता है। माँ श्वेत कमल और श्वेत हंस पर विराजमान हैं जो पवित्रता, सत्य और विवेक का प्रतीक है। उनके हाथों में वीणा (संगीत व कला), वेद पुस्तक (समस्त विद्याओं का मूल), स्फटिक माला (ध्यान व साधना) और अमृत कलश सुशोभित हैं। माँ सरस्वती के आशीर्वाद से जड़ बुद्धि भी महापंडित बन जाता है।
सरस्वती मंत्र के जप से पढ़ने में मन लगता है, कठिन विषय शीघ्र समझ में आते हैं और परीक्षा तथा साक्षात्कारों में उत्कृष्ट सफलता मिलती है। यह उच्च शिक्षा, संगीत, कला, साहित्य और अभिनय के क्षेत्र में ख्याति दिलाता है तथा अज्ञानता व मानसिक भ्रम का नाश करता है।
विद्या अध्ययन प्रारंभ करने से पूर्व माँ का ध्यान करने हेतु
परम शक्तिशाली वाक् बीज मंत्र — नित्य 108 बार जपें
ज्ञान एवं एकाग्रता वृद्धि हेतु
बुद्धि एवं प्रतिभा विकास हेतु
समस्त विद्याओं की सिद्धि हेतु
1 लाख जप करने से व्यक्ति प्रकांड विद्वान और प्रसिद्ध वक्ता बनता है
रचनात्मकता, तीव्र स्मरण शक्ति एवं ज्ञान वृद्धि हेतु
पाप नाश, ज्ञान और धन-धान्य दोनों की प्राप्ति हेतु
वाणी की शुद्धता हेतु
वेदमाता शारदा की कृपा हेतु
भगवान श्रीकृष्ण की कृपा से विद्या लाभ हेतु
सर्वज्ञ श्रीकृष्ण से शीघ्र विद्या प्रदान करने की प्रार्थना
स्क्रीन पर टैप करके या 'जप करें' बटन दबाकर 108 बार मंत्र का जाप पूरा करें। आपका जप रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा।