नौ खगोलीय ग्रहों (सूर्य से केतु) की शांति, अनुकूलता एवं सुख-समृद्धि हेतु वैदिक मंत्र
“नवग्रह मंत्र कुंडली के समस्त ग्रहों के अशुभ प्रभावों को शांत करने और उनके शुभ फलों को बढ़ाने का सबसे सरल, सटीक एवं अचूक वैदिक उपाय है।”
वैदिक ज्योतिष के अनुसार मनुष्य का संपूर्ण जीवन नौ ग्रहों (सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु एवं केतु) की चाल और स्थिति से प्रभावित होता है। जन्मकुंडली में ग्रहों की प्रतिकूल स्थिति से जीवन में संघर्ष, रोग, धन हानि और मानसिक तनाव उत्पन्न होता है। नवग्रह मंत्रों के नियमित जप से ग्रहों की शांति होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा एवं संतुलन स्थापित होता है।
रुद्राक्ष माला, पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख
संबंधित ग्रह का वार (उदा. सूर्य के लिए रविवार, शनि के लिए शनिवार)
प्रतिदिन 1 माला (108 बार) या दशा अनुसार निर्धारित संख्या
प्रत्येक ग्रह के लिए एक विशिष्ट दिन और अधिष्ठाता देव निर्धारित हैं। जैसे रविवार को सूर्य देव, सोमवार को चन्द्र देव, मंगलवार को मंगल देव, बुधवार को बुध देव, गुरुवार को देवगुरु बृहस्पति, शुक्रवार को शुक्र देव, शनिवार को शनि देव और राहु-केतु के लिए शनिवार/मंगलवार अथवा प्रदोष काल में जप करना विशेष फलदायी होता है।
नवग्रह मंत्रों का नियमित पाठ करने से कुंडली के ग्रह दोष, महादशा-अंतर्दशा के अशुभ प्रभाव, कालसर्प दोष और पितृ दोष की शांति होती है। यह जीवन में उत्तम स्वास्थ्य, मानसिक शांति, व्यापारिक प्रगति, पारिवारिक सुख और सर्वत्र विजय प्रदान करता है।
आत्मबल, यश, मान-सम्मान और पिता सुख वृद्धि हेतु (रविवार)
मानसिक शांति, एकाग्रता और माता सुख हेतु (सोमवार)
साहस, पराक्रम, भूमि-भवन लाभ एवं मांगलिक दोष शांति हेतु (मंगलवार)
बुद्धि, व्यापार, वाणी और स्मरण शक्ति वृद्धि हेतु (बुधवार)
ज्ञान, उच्च शिक्षा, संतान सुख, धन और सौभाग्य हेतु (गुरुवार)
वैवाहिक सुख, आकर्षण, धन-वैभव, ऐश्वर्य और कला सिद्धि हेतु (शुक्रवार)
साढ़ेसाती, ढैय्या, कर्म दोष शांति एवं न्याय प्राप्ति हेतु (शनिवार)
अचानक आने वाले संकट, भय, भ्रम और कालसर्प दोष शांति हेतु
आध्यात्मिक उन्नति, रहस्य विद्या एवं अज्ञात व्याधि मुक्ति हेतु
स्क्रीन पर टैप करके या 'जप करें' बटन दबाकर 108 बार मंत्र का जाप पूरा करें। आपका जप रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा।