अकाल मृत्यु हरण, दीर्घायु, कायाकल्प एवं असाध्य रोग नाशक भगवान त्र्यंबकेश्वर महामंत्र
“महामृत्युंजय मंत्र भगवान शिव को समर्पित मृत्यु-विजेता महामंत्र है। 'मृत्युंजय' भगवान शिव का ही पावन नाम है — जिन्होंने काल और मृत्यु पर विजय प्राप्त की है।”
ऋग्वेद और यजुर्वेद में वर्णित महामृत्युंजय मंत्र अकाल मृत्यु के भय, असाध्य रोगों और घोर संकटों से मुक्ति दिलाने वाला साक्षात् संजीवनी मंत्र है। सर्वप्रथम यह मंत्र महर्षि मार्कंडेय को प्राप्त हुआ था, जिसके बल पर उन्होंने यमराज को भी परास्त कर दिया था। रुद्राक्ष भगवान शिव का प्रिय अंश है, इसलिए इस मंत्र का जप रुद्राक्ष की माला से किया जाता है। ज्योतिष शास्त्र में शनि के कुप्रभाव, मारकेश दशा और साढ़ेसाती के निवारण हेतु महामृत्युंजय जप सर्वोत्तम माना गया है।
श्वेत वस्त्र, कुशा का आसन, रुद्राक्ष माला, श्वेत पुष्प, गंगाजल, काले तिल
सोमवार, प्रदोष काल, महाशिवरात्रि, सावन मास एवं शिव वास का समय
रोग मुक्ति हेतु 1,25,000 बार (प्रतिदिन न्यूनतम 108 बार या 11 माला)
महामृत्युंजय मंत्र को 'त्र्यम्बकम मंत्र' भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है त्रिनेत्रधारी भगवान रुद्र। देवाधिदेव महादेव काल के भी महाकाल हैं। वे संहारक होने के साथ-साथ परम कल्याणकारी और अमृत प्रदाता हैं। भगवान शिव की कृपा से साधक के समस्त जन्म-जन्मांतर के पाप, रोग, भय और कष्ट भस्म हो जाते हैं तथा उसे मोक्ष और अमरत्व की अनुभूति प्राप्त होती है।
यह मंत्र प्राण रक्षा, स्वास्थ्य लाभ, दीर्घायु और असाध्य रोगों (जैसे कैंसर, हृदय रोग, पक्षाघात आदि) से मुक्ति दिलाने में रामबाण औषधि का कार्य करता है। जन्म कुंडली में मारकेश ग्रहों, राहु-केतु के सर्प दोष या शनि की पीड़ा से ग्रस्त व्यक्ति को यह अभय कवच प्रदान करता है। घर में इसका नित्य पाठ होने से दुर्घटना, अकाल मृत्यु का भय और नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है तथा मन को परम शांति मिलती है।
संपूर्ण संपुटित महामृत्युंजय मंत्र — अकाल मृत्यु निवारण, असाध्य रोग मुक्ति और दीर्घायु हेतु सर्वोपरि
ऋग्वैदिक मूल मंत्र — नित्य 108 बार जप करने से आरोग्य एवं शांति मिलती है
भगवान शिव का एकाक्षरी बीज मंत्र
मानसिक शांति एवं प्राण ऊर्जा रक्षा हेतु
रोग एवं भय निवारण हेतु
समस्त विपत्तियों से सुरक्षा एवं शिव कृपा हेतु
स्क्रीन पर टैप करके या 'जप करें' बटन दबाकर 108 बार मंत्र का जाप पूरा करें। आपका जप रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा।