शुक्रवार, 28 मई 2027 के लिए New Delhi, Delhi, IN, India का दैनिक पंचांग, जो Astrology Divine द्वारा तैयार किया गया है, एक गहरे ज्योतिषीय मार्गदर्शक का दर्शन है। वेदीय परंपराओं में निहित इस पंचांग में तिथि (चंद्रमा का दिन), नक्षत्र (नक्षत्र), योग और करण जैसे महत्वपूर्ण तत्वों को शामिल किया गया है। New Delhi, Delhi, IN के विशेष ऊर्जा के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया यह पंचांग हिन्दू परंपराओं का पालन करने वाले व्यक्तियों के लिए एक अमूल्य साधन है। शुभ और अशुभ समयों के सटीक इंजन मिलाकर, यह दैनिक पंचांग दैहिक गतिविधियों, धार्मिक कार्यों और सांस्कृतिक घटनाओं की योजना बनाने के लिए एक विश्वसनीय साथी बन जाता है। एस्ट्रोलॉजी डिवाइन सुनिश्चित करता है कि New Delhi, Delhi, IN में शुक्रवार, 28 मई 2027 को एक आध्यात्मिक और समर्थ प्रवृत्ति हो।
| सूर्य राशि | |
| चंद्र राशि | |
| अयाना | उत्तरायण हर साल ‘मकर संक्रांति’ से शुरू होने वाला यह चरण उत्तर की ओर सूर्य की गति का प्रतीक है। इस अत्यंत शुभ अंतराल के दौरान, दिन के घंटे (दिनमान) लगातार बढ़ते हैं जबकि रात के घंटे (रात्रिमान) घटते हैं। सूर्योदय की दिशा दक्षिण-पूर्व से उत्तर-पूर्व की ओर स्थानांतरित हो जाती है। इस अवधि में शिशिर (शीत), वसंत और ग्रीष्म (गर्मी) की ऋतुएं शामिल हैं, जिनमें से प्रत्येक दो महीने तक चलती है। |
| ऋतू | ग्रीष्म |
| दिनमान / रात्रिमान | 13:47:17 / 10:12:25 |
| मध्याह्न (सौर दोपहर) | 12:19 PM |
| तिथि | सप्तमी कृष्ण Paksha 06:26 AM तक देवता: इंद्र • प्रकृति: भद्रा • अगली तिथि: अष्टमी (कृष्ण) |
| नक्षत्र | धनिष्ठा Pad 4 07:14 AM तक देवता: अष्ट वसु (आठ समृद्धि के देवता) • स्वामी: मंगल (वायु) • अगला नक्षत्र: शतभिषा |
| योग | वैधृति 03:44 AM (अगले दिन) तक कम सहारा — चालाक और शक्तिशाली स्वभाव। • अगला योग: विष्कंभ |
| करण | बव 06:26 AM तक अगला करण: बालव |
| वार (दिन) | शुक्रवार (शुक्रवार) |
| विक्रम संवती | 2084 रौद्री स्वामी: चंद्र • इस वर्ष जन्मे व्यक्ति की आयु कम हो सकती है, शरीर भारी होगा और दुष्कर्म की प्रवृत्ति हो सकती है। वे दूसरों के लिए उपद्रव भी बन सकते हैं। |
| शक संवती | 1949 प्लवंग स्वामी: ब्रह्मा • इस वर्ष जन्मे व्यक्ति परिश्रमी और दूसरों की सहायक होंगे, पर रोगों से पीड़ित हो सकते हैं। |
| गुजराती संवत | 2083 साधार्थ स्वामी: सूर्य |
| कलि संवत / कलियुग | 5127 |
| पूर्णिमांत / अमांता | ज्येष्ठ / वैशाख |
| प्रविष्टे (सौर दिवस) | 13 |
| लाहिड़ी अयनांश | 24.246618° |
| अभिजीत मुहूर्त | 11:51 AM – 12:46 PM |
| ब्रह्म मुहूर्त | 04:03 AM – 04:44 AM |
| विजय मुहूर्त | 02:37 PM – 03:32 PM |
| गोधूलि मुहूर्त | 07:12 PM – 07:33 PM |
| अमृत काल | 07:38 PM – 09:25 PM |
| निशीथ काल (मध्यरात्रि) | 11:58 PM – 12:39 AM (अगले दिन) |
| प्रातः संध्या | 04:24 AM – 05:25 AM |
| सायं संध्या | 07:12 PM – 08:14 PM |
| राहु काल | 10:35 AM – 12:19 PM |
| यमगण्ड काल | 03:45 PM – 05:29 PM |
| गुलिक काल | 07:08 AM – 08:52 AM |
| दूर मुहूर्त | 08:10 AM – 09:06 AM 12:46 PM – 01:41 PM |
| कुलीक काल | 09:06 AM – 10:01 AM |
| कंटक काल | 03:32 PM – 04:27 PM |
| कालवेला काल | 05:22 PM – 06:17 PM |
| वर्ज्यम् | 08:56 AM – 10:43 AM |
| अग्निवास (हवन/यज्ञ) | पृथ्वी पर सर्व सिद्धिप्रद (पूर्ण सफलता) अग्नि का वास पृथ्वी पर है। हवन एवं यज्ञ अनुष्ठान के लिए अत्यंत शुभ फलदायी। |
| शिववास (रुद्राभिषेक) | श्मशान में मृत्यु कष्ट (अत्यंत कष्ट) भगवान शिव श्मशान में लीन हैं। रुद्राभिषेक के लिए त्याज्य / वर्जित। |
| दिशा शूल | पश्चिम उपाय: दही या जौ का सेवन करें |
| होमाहुति ग्रह | शुक्र (♀) |
| चंद्र निवास | पश्चिमराहु वास: दक्षिण-पूर्व |
| आनंददी योग | ध्यात्री शुभ फल (सौभाग्य) |
| कलियुग वर्ष | 5128 वर्ष |
| कलि अहर्गण | 1873088 दिन |
| राष्ट्रीय सौर दिनांक | 🇮🇳ज्येष्ठ 07, 1949 शक |
| राष्ट्रीय निरयण दिनांक | 🇮🇳ज्येष्ठ 15, 1949 शक |
| लाहिड़ी अयनांश | 24.246618° |
| Rata Die | 740129 |
| जूलियन दिनांक | मई 15, 2027 ईस्वी |
| जूलियन दिवस / MJD | 2461553.5 Days / 61553 Days |
सूर्योदय कालीन आकाशीय ग्रह स्थिति एवं लग्न चक्र
| ग्रह | राशि | अंश | नक्षत्र (पद) | गति |
|---|---|---|---|---|
| सूर्य | | 12° 13' | रोहिणी पद 1 | मार्गी (D) |
| चंद्र | | 05° 45' | धनिष्ठा पद 4 | मार्गी (D) |
| मंगल | | 11° 08' | मघा पद 4 | मार्गी (D) |
| बुध | | 05° 03' | मृगशिरा पद 4 | मार्गी (D) |
| गुरु | | 25° 39' | आश्लेषा पद 3 | मार्गी (D) |
| शुक्र | | 21° 42' | भरणी पद 3 | मार्गी (D) |
| शनि | | 29° 23' | रेवती पद 4 | मार्गी (D) |
| राहु | | 20° 49' | श्रवण पद 4 | वक्री (R) |
| केतु | | 20° 49' | आश्लेषा पद 2 | वक्री (R) |
| लग्न | | 11° 11' | रोहिणी पद 1 | मार्गी (D) |
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संस्कृत शब्द पंचांग दो शब्दों से बना है: पंच (पांच) + अंग (तत्व या भाग)। अपने शुभ कार्यों व दैनिक गतिविधियों को इन खगोलीय ऊर्जाओं के साथ जोड़ना सफलता, मानसिक शांति और समृद्धि लाता है।
सूर्य और चंद्रमा के मध्य 12° की कोणीय दूरी को एक तिथि कहा जाता है। एक चंद्र मास में कुल 30 तिथियां होती हैं, जो शुक्ल पक्ष (बढ़ता चंद्रमा) और कृष्ण पक्ष (घटता चंद्रमा) में 15-15 तिथियों में विभाजित होती हैं। तिथि कार्य की भावनात्मक ऊर्जा तय करती है।
आकाश मंडल 13°20' के 27 नक्षत्रों में विभाजित है। किसी समय विशेष पर चंद्रमा जिस नक्षत्र में गोचर कर रहा होता है, वह उस समय की मानसिक वृत्ति, यात्रा, विवाह और महत्वपूर्ण कार्यों के फल को सबसे अधिक प्रभावित करता है।
सूर्य और चंद्रमा के निरयण देशांतर के जोड़ को 27 भागों में बांटने से 27 योग बनते हैं। सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग, और रवि योग जैसे शुभ योग सभी दोषों को शांत कर कार्यों में निश्चित सफलता दिलाते हैं।
एक तिथि के आधे भाग (6° दूरी) को करण कहा जाता है। कुल 11 करण होते हैं (4 स्थिर और 7 चर)। करण सूक्ष्म समय-खंड होता है जो व्यापार, आर्थिक निवेश, यात्रा और निर्माण कार्यों का सटीक मुहूर्त तय करता है।
स्थानीय सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक की अवधि 'वार' कहलाती है। प्रत्येक वार के अधिष्ठाता ग्रह होते हैं (रविवार-सूर्य, सोमवार-चंद्र, मंगलवार-मंगल, बुधवार-बुध, गुरुवार-गुरु, शुक्रवार-शुक्र, शनिवार-शनि)।
प्रतिदिन लगभग 90 मिनट की अवधि छाया ग्रह राहु के आधिपत्य में होती है। नया व्यवसाय शुरू करना, अनुबंध पर हस्ताक्षर, विवाह, गृह प्रवेश या वाहन खरीद जैसे मांगलिक कार्य राहुकाल में करने से विघ्न आने की संभावना रहती है।
हिन्दू पंचांग, शुभ मुहूर्त, राहुकाल और ज्योतिषीय गणना से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न व उत्तर।
प्रत्येक स्थान के सटीक अक्षांश (Latitude) व देशांतर (Longitude) अनुसार स्थानीय सूर्योदय, सूर्यास्त, तिथि व शुभ मुहूर्त।