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मंगलवार, 27 जनवरी 2037 का पंचांग

मंगलवार, 27 जनवरी 2037 के लिए New Delhi, Delhi, IN, India का दैनिक पंचांग, जो Astrology Divine द्वारा तैयार किया गया है, एक गहरे ज्योतिषीय मार्गदर्शक का दर्शन है। वेदीय परंपराओं में निहित इस पंचांग में तिथि (चंद्रमा का दिन), नक्षत्र (नक्षत्र), योग और करण जैसे महत्वपूर्ण तत्वों को शामिल किया गया है। New Delhi, Delhi, IN के विशेष ऊर्जा के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया यह पंचांग हिन्दू परंपराओं का पालन करने वाले व्यक्तियों के लिए एक अमूल्य साधन है। शुभ और अशुभ समयों के सटीक इंजन मिलाकर, यह दैनिक पंचांग दैहिक गतिविधियों, धार्मिक कार्यों और सांस्कृतिक घटनाओं की योजना बनाने के लिए एक विश्वसनीय साथी बन जाता है। एस्ट्रोलॉजी डिवाइन सुनिश्चित करता है कि New Delhi, Delhi, IN में मंगलवार, 27 जनवरी 2037 को एक आध्यात्मिक और समर्थ प्रवृत्ति हो।

आज का पर्व और व्रत 5 सूचीबद्ध
जया एकादशीजया एकादशीईद अल - अज़्हाबकरीदरोहिणी व्रत
बाण: मृत्यु
Death / Severe Obstacles

24 घंटे का दृश्य पंचांग टाइम-चार्ट

लाइव 03:50:42 AM
मंगलवार, 27 जनवरी 2037 New Delhi, Delhi, IN • सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक 24 घंटे का विस्तृत चक्र
शुभ मुहूर्त अशुभ काल दिन रात
24 घंटे देखने के लिए चार्ट को दायें-बायें स्वाइप करें 🌅 24H Cycle
दिन/रात
समय (24H)
तिथि
नक्षत्र
योग
करण
काल / मुहूर्त
दिन का समय (Daytime)
रात्रि काल (Nighttime)
07:12 AM
05:56 PM
07:11 AM
9 AM
12 PM
3 PM
6 PM
9 PM
12 AM
3 AM
6 AM
दशमी (शुक्ल) तक 08:28 AM
द्वादशी (शुक्ल) तक 05:19 AM
रोहिणी तक 02:35 AM
मृगशिरा तक 01:15 AM
ब्रह्म तक 08:08 PM
इंद्र तक 05:28 PM
गर तक 08:28 AM
बव तक 06:12 PM
दुर्मुहूर्त
यमगण्ड
कंटक
अभिजित
कालवेला
गुलिक काल
यमघण्ट
विजय मुहूर्त
राहुकाल
कुलीक
गोधूलि मुहूर्त
वर्ज्यम
दुर्मुहूर्त
अमृत काल
निशीथ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त
किसी भी खंड पर होवर / टैप करके वैदिक प्रभाव व समय देखें। मंगलवार, 27 जनवरी 2037 | New Delhi, Delhi, IN
सूर्य एवं चंद्र चक्र शिशिर Ritu
सूर्योदय 07:12 AM
सूर्यास्त 05:56 PM
चंद्रोदय 01:53 PM
चंद्रास्त 02:44 AM (अगले दिन)
सूर्य राशि मकर मकर ♑ नक्षत्र: श्रवण (पद 1) • स्वामी: चंद्र
चंद्र राशि वृषभ वृषभ ♉︎ नक्षत्र: रोहिणी (पद 1) • स्वामी: चंद्र
अयाना उत्तरायण हर साल ‘मकर संक्रांति’ से शुरू होने वाला यह चरण उत्तर की ओर सूर्य की गति का प्रतीक है। इस अत्यंत शुभ अंतराल के दौरान, दिन के घंटे (दिनमान) लगातार बढ़ते हैं जबकि रात के घंटे (रात्रिमान) घटते हैं। सूर्योदय की दिशा दक्षिण-पूर्व से उत्तर-पूर्व की ओर स्थानांतरित हो जाती है। इस अवधि में शिशिर (शीत), वसंत और ग्रीष्म (गर्मी) की ऋतुएं शामिल हैं, जिनमें से प्रत्येक दो महीने तक चलती है।
ऋतू शिशिर
दिनमान / रात्रिमान 10:44:45 / 13:14:48
मध्याह्न (सौर दोपहर) 12:34 PM
पंचांग तत्व 5 Core Angas
तिथि दशमी शुक्ल Paksha 08:28 AM तक देवता: धर्म • प्रकृति: पूर्णा • अगली तिथि: एकादशी (शुक्ल)
नक्षत्र रोहिणी Pad 1 02:35 AM (अगले दिन) तक देवता: ब्रह्मा (सृष्टिकर्ता) • स्वामी: चंद्र (पृथ्वी) • अगला नक्षत्र: मृगशिरा
योग ब्रह्म 08:08 PM तक ज्ञान और विवेक वाला, भरोसेमंद व्यक्ति। • अगला योग: इंद्र
करण गर 08:28 AM तक अगला करण: वणिज
वार (दिन) मंगलवार (मंगलवार)
हिंदू महीना और वर्ष Vedic Era
विक्रम संवती 2093 शुक्ल स्वामी: शिव • इस वर्ष जन्मे व्यक्ति अत्यंत सुंदर होगा, सुखी पारिवारिक जीवन का आनंद लेगा और उत्तम चरित्र वाला होगा।
शक संवती 1958 नल स्वामी: शनि • इस संवत्सर का व्यक्ति अच्छा व्यापारी होगा और धनवान बनेगा।
गुजराती संवत 2092 विभव स्वामी: विष्णु
कलि संवत / कलियुग 5137
पूर्णिमांत / अमांता माघ / माघ
प्रविष्टे (सौर दिवस) 14
लाहिड़ी अयनांश 24.381726°
शुभ समय (Shubh Kaal) Auspicious
अभिजीत मुहूर्त 12:13 PM – 12:56 PM
ब्रह्म मुहूर्त 05:26 AM – 06:19 AM
विजय मुहूर्त 02:22 PM – 03:05 PM
गोधूलि मुहूर्त 05:56 PM – 06:23 PM
अमृत काल
11:25 PM – 01:00 AM (अगले दिन)
निशीथ काल (मध्यरात्रि) 12:07 AM – 01:00 AM (अगले दिन)
प्रातः संध्या 05:52 AM – 07:12 AM
सायं संध्या 05:56 PM – 07:16 PM
आज के शुभ योग:
रवि योग सूर्य और चंद्रमा द्वारा निर्मित एक शक्तिशाली योग। यह अशुभ प्रभावों को नष्ट करने के लिए जाना जाता है और नई शुरुआत के लिए उत्कृष्ट है।
अशुभ समय (Ashubh Kaal) शुभ कार्य वर्जित
राहु काल 03:15 PM – 04:36 PM
यमगण्ड काल 09:53 AM – 11:13 AM
गुलिक काल 12:34 PM – 01:55 PM
दूर मुहूर्त
09:21 AM – 10:04 AM
11:14 PM – 12:07 AM (अगले दिन)
कुलीक काल 04:31 PM – 05:13 PM
कंटक काल 10:47 AM – 11:30 AM
कालवेला काल 12:13 PM – 12:56 PM
वर्ज्यम्
06:41 PM – 08:16 PM
हवन, रुद्राभिषेक व यात्रा विचार अनुष्ठान मुहूर्त
अग्निवास (हवन/यज्ञ) पृथ्वी पर
सर्व सिद्धिप्रद (पूर्ण सफलता)
अग्नि का वास पृथ्वी पर है। हवन एवं यज्ञ अनुष्ठान के लिए अत्यंत शुभ फलदायी।
शिववास (रुद्राभिषेक) क्रीड़ा में
कष्ट (बाधाएं)
भगवान शिव क्रीड़ा में व्यस्त हैं। रुद्राभिषेक के लिए त्याज्य / वर्जित।
दिशा शूल उत्तर
उपाय: गुड़ या साबुत धनिया खाकर प्रस्थान करें
होमाहुति ग्रह मंगल (♂)
चंद्र निवास दक्षिणराहु वास: पश्चिम
आनंददी योग मातंग
संतान प्राप्ति (कुल वृद्धि)
वर्ष का मन्त्रिमण्डल (संवत 2093) Mantri Mandala
राजा (Supreme Ruler)
सूर्य
मन्त्री (Prime Minister)
शुक्र
सेनाधिपति (Defense)
गुरु
धान्याधिपति (Rabi Crops)
शनि
सस्याधिपति (Kharif Harvest)
सूर्य
मेघाधिपति (Rain & Clouds)
गुरु
धनाधिपति (Treasury & Wealth)
सूर्य
रसाधिपति (Liquids & Dairy)
मंगल
अन्य कैलेंडर एवं युग काल गणना Epoch Chronology
कलियुग वर्ष 5138 वर्ष
कलि अहर्गण 1876620 दिन
राष्ट्रीय सौर दिनांक 🇮🇳माघ 07, 1958 शक
राष्ट्रीय निरयण दिनांक 🇮🇳माघ 16, 1958 शक
लाहिड़ी अयनांश 24.381726°
Rata Die 743661
जूलियन दिनांक जनवरी 14, 2037 ईस्वी
जूलियन दिवस / MJD 2465085.5 Days / 65085 Days
दैनिक लग्न कुण्डली एवं ग्रह गोचर स्थिति

सूर्योदय कालीन आकाशीय ग्रह स्थिति एवं लग्न चक्र

सूर्योदय चक्र 27 Jan 2037
101112123456789सू, शु, केचंगुरामं, बु
दैनिक लग्न चक्र (New Delhi, Delhi, IN) उत्तर भारतीय
ग्रह राशि अंश नक्षत्र (पद) गति
सूर्य मकरमकर 13° 04' श्रवण पद 1 मार्गी (D)
चंद्र वृषभवृषभ 12° 25' रोहिणी पद 1 मार्गी (D)
मंगल धनुधनु 01° 47' मूल पद 1 मार्गी (D)
बुध धनुधनु 21° 59' पूर्वाषाढ़ा पद 3 मार्गी (D)
गुरु वृषभवृषभ 22° 05' रोहिणी पद 4 वक्री (R)
शुक्र मकरमकर 00° 03' उत्तराषाढ़ा पद 2 मार्गी (D)
शनि सिंहसिंह 06° 47' मघा पद 3 वक्री (R)
राहु कर्ककर्क 13° 38' पुष्य पद 4 वक्री (R)
केतु मकरमकर 13° 38' श्रवण पद 2 वक्री (R)
लग्न मकरमकर 11° 57' श्रवण पद 1 मार्गी (D)
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वैदिक ज्ञान एवं मार्गदर्शन

वैदिक पंचांग के 5 मुख्य अंग (पंच-अंग)

संस्कृत शब्द पंचांग दो शब्दों से बना है: पंच (पांच) + अंग (तत्व या भाग)। अपने शुभ कार्यों व दैनिक गतिविधियों को इन खगोलीय ऊर्जाओं के साथ जोड़ना सफलता, मानसिक शांति और समृद्धि लाता है।

1. तिथि (Lunar Day)

सूर्य और चंद्रमा के मध्य 12° की कोणीय दूरी को एक तिथि कहा जाता है। एक चंद्र मास में कुल 30 तिथियां होती हैं, जो शुक्ल पक्ष (बढ़ता चंद्रमा) और कृष्ण पक्ष (घटता चंद्रमा) में 15-15 तिथियों में विभाजित होती हैं। तिथि कार्य की भावनात्मक ऊर्जा तय करती है।

2. नक्षत्र (Lunar Mansion)

आकाश मंडल 13°20' के 27 नक्षत्रों में विभाजित है। किसी समय विशेष पर चंद्रमा जिस नक्षत्र में गोचर कर रहा होता है, वह उस समय की मानसिक वृत्ति, यात्रा, विवाह और महत्वपूर्ण कार्यों के फल को सबसे अधिक प्रभावित करता है।

3. योग (Luni-Solar Harmony)

सूर्य और चंद्रमा के निरयण देशांतर के जोड़ को 27 भागों में बांटने से 27 योग बनते हैं। सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग, और रवि योग जैसे शुभ योग सभी दोषों को शांत कर कार्यों में निश्चित सफलता दिलाते हैं।

4. करण (Half Tithi)

एक तिथि के आधे भाग (6° दूरी) को करण कहा जाता है। कुल 11 करण होते हैं (4 स्थिर और 7 चर)। करण सूक्ष्म समय-खंड होता है जो व्यापार, आर्थिक निवेश, यात्रा और निर्माण कार्यों का सटीक मुहूर्त तय करता है।

5. वार (Solar Weekday)

स्थानीय सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक की अवधि 'वार' कहलाती है। प्रत्येक वार के अधिष्ठाता ग्रह होते हैं (रविवार-सूर्य, सोमवार-चंद्र, मंगलवार-मंगल, बुधवार-बुध, गुरुवार-गुरु, शुक्रवार-शुक्र, शनिवार-शनि)।

राहुकाल में शुभ कार्य क्यों वर्जित हैं?

प्रतिदिन लगभग 90 मिनट की अवधि छाया ग्रह राहु के आधिपत्य में होती है। नया व्यवसाय शुरू करना, अनुबंध पर हस्ताक्षर, विवाह, गृह प्रवेश या वाहन खरीद जैसे मांगलिक कार्य राहुकाल में करने से विघ्न आने की संभावना रहती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दैनिक पंचांग से जुड़े सामान्य प्रश्न

हिन्दू पंचांग, शुभ मुहूर्त, राहुकाल और ज्योतिषीय गणना से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न व उत्तर।

दृक पंचांग की गणना आधुनिक खगोलीय वेधशालाओं (NASA/JPL Ephemeris) द्वारा प्रमाणित प्रत्यक्ष आकाश में ग्रहों की वास्तविक स्थिति (चित्रापक्षीय/लाहिड़ी अयनांश) पर आधारित होती है। पारंपरिक सूर्य सिद्धांत प्राचीन औसत गति सूत्रों का उपयोग करता है। एस्ट्रोलॉजी डिवाइन शुद्ध और सटीक दृक गणित का उपयोग करता है ताकि आपको सही सूर्योदय और मुहूर्त समय मिल सके।

स्थानीय दोपहर के मध्य समय से लगभग 24 मिनट पहले और 24 मिनट बाद (कुल 48 मिनट) की अवधि को अभिजित मुहूर्त कहा जाता है। भगवान श्री हरि विष्णु के आशीर्वाद से युक्त यह मुहूर्त अधिकांश सूक्ष्म दोषों को नष्ट करने में समर्थ होता है और यात्रा, नए कार्य, गृह प्रवेश या व्यापार आरंभ करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है (बुधवार को छोड़कर)।

वैदिक ज्योतिष में दिन की गणना स्थानीय सूर्योदय से होती है। किसी स्थान के अक्षांश (Latitude), देशांतर (Longitude) और ऊंचाई के कारण वहां सूर्योदय और सूर्यास्त के समय में अंतर आता है, जिससे राहुकाल, चौघड़िया और तिथि समाप्ति काल भी कुछ मिनट भिन्न होते हैं।

पूर्णिमांत कैलेंडर में महीने का अंत पूर्णिमा (Full Moon Day) पर होता है, जो मुख्य रूप से उत्तर भारतीय राज्यों (राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा) में प्रचलित है। अमान्त कैलेंडर में महीने का अंत अमावस्या (New Moon Day) पर होता है, जो गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में मान्य है।

दिशा शूल की दिशा में यात्रा करना शुभ नहीं माना जाता। यदि यात्रा अति आवश्यक हो, तो वार अनुसार वैदिक उपाय करके ही निकलें: रविवार (पान या घी खाकर), सोमवार (दर्पण देखकर या दूध पीकर), मंगलवार (गुड़ या धनिया खाकर), बुधवार (तिल या गुड़ खाकर), गुरुवार (दही या पीली सरसों खाकर), शुक्रवार (दही या जौ खाकर), शनिवार (अदरक या उड़द खाकर)
स्थान अनुसार वैदिक पंचांग

प्रमुख धार्मिक तीर्थ व शहरों का दैनिक पंचांग

प्रत्येक स्थान के सटीक अक्षांश (Latitude) व देशांतर (Longitude) अनुसार स्थानीय सूर्योदय, सूर्यास्त, तिथि व शुभ मुहूर्त।

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