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बुधवार, 26 मार्च 2025 का पंचांग

बुधवार, 26 मार्च 2025 के लिए New Delhi, Delhi, IN, India का दैनिक पंचांग, जो Astrology Divine द्वारा तैयार किया गया है, एक गहरे ज्योतिषीय मार्गदर्शक का दर्शन है। वेदीय परंपराओं में निहित इस पंचांग में तिथि (चंद्रमा का दिन), नक्षत्र (नक्षत्र), योग और करण जैसे महत्वपूर्ण तत्वों को शामिल किया गया है। New Delhi, Delhi, IN के विशेष ऊर्जा के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया यह पंचांग हिन्दू परंपराओं का पालन करने वाले व्यक्तियों के लिए एक अमूल्य साधन है। शुभ और अशुभ समयों के सटीक इंजन मिलाकर, यह दैनिक पंचांग दैहिक गतिविधियों, धार्मिक कार्यों और सांस्कृतिक घटनाओं की योजना बनाने के लिए एक विश्वसनीय साथी बन जाता है। एस्ट्रोलॉजी डिवाइन सुनिश्चित करता है कि New Delhi, Delhi, IN में बुधवार, 26 मार्च 2025 को एक आध्यात्मिक और समर्थ प्रवृत्ति हो।

आज का पर्व और व्रत 1 सूचीबद्ध
वैष्णव पापमोचनी एकादशी
बाण: चोर
Theft / Loss

24 घंटे का दृश्य पंचांग टाइम-चार्ट

लाइव 07:54:36 AM
बुधवार, 26 मार्च 2025 New Delhi, Delhi, IN • सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक 24 घंटे का विस्तृत चक्र
शुभ मुहूर्त अशुभ काल दिन रात
24 घंटे देखने के लिए चार्ट को दायें-बायें स्वाइप करें 🌅 24H Cycle
दिन/रात
समय (24H)
तिथि
नक्षत्र
योग
करण
काल / मुहूर्त
दिन का समय (Daytime)
रात्रि काल (Nighttime)
06:18 AM
06:36 PM
06:17 AM
9 AM
12 PM
3 PM
6 PM
9 PM
12 AM
3 AM
6 AM
द्वादशी (कृष्ण) तक 01:59 AM
त्रयोदशी (कृष्ण) तक 11:13 PM
धनिष्ठा तक 02:45 AM
शतभिषा तक 12:44 AM
सिद्ध तक 12:26 PM
साध्य तक 09:24 AM
कौलव तक 02:52 PM
गर तक 12:28 PM
कुलीक
वर्ज्यम
यमगण्ड
गुलिक काल
दुर्मुहूर्त
अभिजित
कंटक
राहुकाल
कालवेला
विजय मुहूर्त
यमघण्ट
अमृत काल
गोधूलि मुहूर्त
निशीथ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त
किसी भी खंड पर होवर / टैप करके वैदिक प्रभाव व समय देखें। बुधवार, 26 मार्च 2025 | New Delhi, Delhi, IN
सूर्य एवं चंद्र चक्र वसंत Ritu
सूर्योदय 06:18 AM
सूर्यास्त 06:36 PM
चंद्रोदय 04:15 AM
चंद्रास्त 03:18 PM
सूर्य राशि मीन मीन ♓ नक्षत्र: उत्तर भाद्रपद (पद 3) • स्वामी: शनि
चंद्र राशि मकर मकर ♑ नक्षत्र: धनिष्ठा (पद 1) • स्वामी: मंगल
अयाना उत्तरायण हर साल ‘मकर संक्रांति’ से शुरू होने वाला यह चरण उत्तर की ओर सूर्य की गति का प्रतीक है। इस अत्यंत शुभ अंतराल के दौरान, दिन के घंटे (दिनमान) लगातार बढ़ते हैं जबकि रात के घंटे (रात्रिमान) घटते हैं। सूर्योदय की दिशा दक्षिण-पूर्व से उत्तर-पूर्व की ओर स्थानांतरित हो जाती है। इस अवधि में शिशिर (शीत), वसंत और ग्रीष्म (गर्मी) की ऋतुएं शामिल हैं, जिनमें से प्रत्येक दो महीने तक चलती है।
ऋतू वसंत
दिनमान / रात्रिमान 12:17:40 / 11:41:11
मध्याह्न (सौर दोपहर) 12:27 PM
पंचांग तत्व 5 Core Angas
तिथि द्वादशी कृष्ण Paksha 01:59 AM (अगले दिन) तक देवता: सविता • प्रकृति: भद्रा • अगली तिथि: त्रयोदशी (कृष्ण)
नक्षत्र धनिष्ठा Pad 1 02:45 AM (अगले दिन) तक देवता: अष्ट वसु (आठ समृद्धि के देवता) • स्वामी: मंगल (पृथ्वी) • अगला नक्षत्र: शतभिषा
योग सिद्ध 12:26 PM तक सफल और सिद्ध — अच्छा स्वभाव और आध्यात्मिक रुचि। • अगला योग: साध्य
करण कौलव 02:52 PM तक अगला करण: तैतिल
वार (दिन) बुधवार (बुधवार)
हिंदू महीना और वर्ष Vedic Era
विक्रम संवती 2081 पिंगल स्वामी: राहु • इस वर्ष जन्मे व्यक्ति को शिर की बीमारियाँ हो सकती हैं।
शक संवती 1946 क्रोधी स्वामी: शनि • इस संवत्सर का व्यक्ति सदैव कार्यों में जल्दबाजी करेगा और अपने उद्यम बिगाड़ देगा। उसका नैतिक जीवन भी ढीला हो सकता है।
गुजराती संवत 2080 नल स्वामी: शनि
कलि संवत / कलियुग 5125
पूर्णिमांत / अमांता चैत्र / फाल्गुन
प्रविष्टे (सौर दिवस) 12
लाहिड़ी अयनांश 24.216285°
शुभ समय (Shubh Kaal) Auspicious
अभिजीत मुहूर्त 12:02 PM – 12:51 PM
ब्रह्म मुहूर्त 04:44 AM – 05:31 AM
विजय मुहूर्त 02:30 PM – 03:19 PM
गोधूलि मुहूर्त 06:36 PM – 06:59 PM
अमृत काल
04:49 PM – 06:21 PM
निशीथ काल (मध्यरात्रि) 12:03 AM – 12:50 AM (अगले दिन)
प्रातः संध्या 05:08 AM – 06:18 AM
सायं संध्या 06:36 PM – 07:46 PM
अशुभ समय (Ashubh Kaal) शुभ कार्य वर्जित
राहु काल 12:27 PM – 01:59 PM
यमगण्ड काल 07:50 AM – 09:22 AM
गुलिक काल 10:55 AM – 12:27 PM
दूर मुहूर्त
12:02 PM – 12:51 PM
कुलीक काल 06:18 AM – 07:07 AM
कंटक काल 12:02 PM – 12:51 PM
कालवेला काल 01:41 PM – 02:30 PM
वर्ज्यम्
07:38 AM – 09:10 AM
हवन, रुद्राभिषेक व यात्रा विचार अनुष्ठान मुहूर्त
अग्निवास (हवन/यज्ञ) पाताल में
धननाश (आर्थिक हानि)
अग्नि का वास पाताल में है। हवन के लिए त्याज्य / अशुभ।
शिववास (रुद्राभिषेक) वृषभारूढ़ (नन्दी पर)
अभीष्ट सिद्धि (मनोकामना पूर्ति)
भगवान शिव नन्दी बैल पर सवार हैं। रुद्राभिषेक के लिए अत्यंत शुभ फलदायी।
दिशा शूल उत्तर
उपाय: तिल या सरसों के बीज का सेवन करें
होमाहुति ग्रह बुध (☿)
चंद्र निवास दक्षिणराहु वास: दक्षिण-पश्चिम
आनंददी योग मित्र
सफलता (पुष्टि)
वर्ष का मन्त्रिमण्डल (संवत 2081) Mantri Mandala
राजा (Supreme Ruler)
मंगल
मन्त्री (Prime Minister)
सूर्य
सेनाधिपति (Defense)
शनि
धान्याधिपति (Rabi Crops)
चंद्र
सस्याधिपति (Kharif Harvest)
मंगल
मेघाधिपति (Rain & Clouds)
शनि
धनाधिपति (Treasury & Wealth)
मंगल
रसाधिपति (Liquids & Dairy)
गुरु
अन्य कैलेंडर एवं युग काल गणना Epoch Chronology
कलियुग वर्ष 5126 वर्ष
कलि अहर्गण 1872295 दिन
राष्ट्रीय सौर दिनांक 🇮🇳चैत्र 05, 1947 शक
राष्ट्रीय निरयण दिनांक 🇮🇳चैत्र 14, 1946 शक
लाहिड़ी अयनांश 24.216285°
Rata Die 739336
जूलियन दिनांक मार्च 13, 2025 ईस्वी
जूलियन दिवस / MJD 2460760.5 Days / 60760 Days
दैनिक लग्न कुण्डली एवं ग्रह गोचर स्थिति

सूर्योदय कालीन आकाशीय ग्रह स्थिति एवं लग्न चक्र

सूर्योदय चक्र 26 Mar 2025
121234567891011सू, बु, शु, रागुमंकेचं
दैनिक लग्न चक्र (New Delhi, Delhi, IN के अनुसार)
ग्रह राशि अंश नक्षत्र (पद) गति
सूर्य मीनमीन 11° 24' उत्तर भाद्रपद पद 3 मार्गी (D)
चंद्र मकरमकर 24° 46' धनिष्ठा पद 1 मार्गी (D)
मंगल मिथुनमिथुन 27° 33' पुनर्वसु पद 3 मार्गी (D)
बुध मीनमीन 09° 08' उत्तर भाद्रपद पद 2 वक्री (R)
गुरु वृषभवृषभ 20° 52' रोहिणी पद 4 मार्गी (D)
शुक्र मीनमीन 06° 35' उत्तर भाद्रपद पद 1 वक्री (R)
शनि कुंभकुंभ 29° 33' पूर्व भाद्रपद पद 3 मार्गी (D)
राहु मीनमीन 02° 50' पूर्व भाद्रपद पद 4 वक्री (R)
केतु कन्याकन्या 02° 50' उत्तरा फाल्गुनी पद 2 वक्री (R)
लग्न मीनमीन 09° 58' उत्तर भाद्रपद पद 2 मार्गी (D)
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वैदिक ज्ञान एवं मार्गदर्शन

वैदिक पंचांग के 5 मुख्य अंग (पंच-अंग)

संस्कृत शब्द पंचांग दो शब्दों से बना है: पंच (पांच) + अंग (तत्व या भाग)। अपने शुभ कार्यों व दैनिक गतिविधियों को इन खगोलीय ऊर्जाओं के साथ जोड़ना सफलता, मानसिक शांति और समृद्धि लाता है।

1. तिथि (Lunar Day)

सूर्य और चंद्रमा के मध्य 12° की कोणीय दूरी को एक तिथि कहा जाता है। एक चंद्र मास में कुल 30 तिथियां होती हैं, जो शुक्ल पक्ष (बढ़ता चंद्रमा) और कृष्ण पक्ष (घटता चंद्रमा) में 15-15 तिथियों में विभाजित होती हैं। तिथि कार्य की भावनात्मक ऊर्जा तय करती है।

2. नक्षत्र (Lunar Mansion)

आकाश मंडल 13°20' के 27 नक्षत्रों में विभाजित है। किसी समय विशेष पर चंद्रमा जिस नक्षत्र में गोचर कर रहा होता है, वह उस समय की मानसिक वृत्ति, यात्रा, विवाह और महत्वपूर्ण कार्यों के फल को सबसे अधिक प्रभावित करता है।

3. योग (Luni-Solar Harmony)

सूर्य और चंद्रमा के निरयण देशांतर के जोड़ को 27 भागों में बांटने से 27 योग बनते हैं। सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग, और रवि योग जैसे शुभ योग सभी दोषों को शांत कर कार्यों में निश्चित सफलता दिलाते हैं।

4. करण (Half Tithi)

एक तिथि के आधे भाग (6° दूरी) को करण कहा जाता है। कुल 11 करण होते हैं (4 स्थिर और 7 चर)। करण सूक्ष्म समय-खंड होता है जो व्यापार, आर्थिक निवेश, यात्रा और निर्माण कार्यों का सटीक मुहूर्त तय करता है।

5. वार (Solar Weekday)

स्थानीय सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक की अवधि 'वार' कहलाती है। प्रत्येक वार के अधिष्ठाता ग्रह होते हैं (रविवार-सूर्य, सोमवार-चंद्र, मंगलवार-मंगल, बुधवार-बुध, गुरुवार-गुरु, शुक्रवार-शुक्र, शनिवार-शनि)।

राहुकाल में शुभ कार्य क्यों वर्जित हैं?

प्रतिदिन लगभग 90 मिनट की अवधि छाया ग्रह राहु के आधिपत्य में होती है। नया व्यवसाय शुरू करना, अनुबंध पर हस्ताक्षर, विवाह, गृह प्रवेश या वाहन खरीद जैसे मांगलिक कार्य राहुकाल में करने से विघ्न आने की संभावना रहती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दैनिक पंचांग से जुड़े सामान्य प्रश्न

हिन्दू पंचांग, शुभ मुहूर्त, राहुकाल और ज्योतिषीय गणना से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न व उत्तर।

दृक पंचांग की गणना आधुनिक खगोलीय वेधशालाओं (NASA/JPL Ephemeris) द्वारा प्रमाणित प्रत्यक्ष आकाश में ग्रहों की वास्तविक स्थिति (चित्रापक्षीय/लाहिड़ी अयनांश) पर आधारित होती है। पारंपरिक सूर्य सिद्धांत प्राचीन औसत गति सूत्रों का उपयोग करता है। एस्ट्रोलॉजी डिवाइन शुद्ध और सटीक दृक गणित का उपयोग करता है ताकि आपको सही सूर्योदय और मुहूर्त समय मिल सके।

स्थानीय दोपहर के मध्य समय से लगभग 24 मिनट पहले और 24 मिनट बाद (कुल 48 मिनट) की अवधि को अभिजित मुहूर्त कहा जाता है। भगवान श्री हरि विष्णु के आशीर्वाद से युक्त यह मुहूर्त अधिकांश सूक्ष्म दोषों को नष्ट करने में समर्थ होता है और यात्रा, नए कार्य, गृह प्रवेश या व्यापार आरंभ करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है (बुधवार को छोड़कर)।

वैदिक ज्योतिष में दिन की गणना स्थानीय सूर्योदय से होती है। किसी स्थान के अक्षांश (Latitude), देशांतर (Longitude) और ऊंचाई के कारण वहां सूर्योदय और सूर्यास्त के समय में अंतर आता है, जिससे राहुकाल, चौघड़िया और तिथि समाप्ति काल भी कुछ मिनट भिन्न होते हैं।

पूर्णिमांत कैलेंडर में महीने का अंत पूर्णिमा (Full Moon Day) पर होता है, जो मुख्य रूप से उत्तर भारतीय राज्यों (राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा) में प्रचलित है। अमान्त कैलेंडर में महीने का अंत अमावस्या (New Moon Day) पर होता है, जो गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में मान्य है।

दिशा शूल की दिशा में यात्रा करना शुभ नहीं माना जाता। यदि यात्रा अति आवश्यक हो, तो वार अनुसार वैदिक उपाय करके ही निकलें: रविवार (पान या घी खाकर), सोमवार (दर्पण देखकर या दूध पीकर), मंगलवार (गुड़ या धनिया खाकर), बुधवार (तिल या गुड़ खाकर), गुरुवार (दही या पीली सरसों खाकर), शुक्रवार (दही या जौ खाकर), शनिवार (अदरक या उड़द खाकर)
स्थान अनुसार वैदिक पंचांग

प्रमुख धार्मिक तीर्थ व शहरों का दैनिक पंचांग

प्रत्येक स्थान के सटीक अक्षांश (Latitude) व देशांतर (Longitude) अनुसार स्थानीय सूर्योदय, सूर्यास्त, तिथि व शुभ मुहूर्त।

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