रविवार, 22 मार्च 2026 के लिए New Delhi, Delhi, IN, India का दैनिक पंचांग, जो Astrology Divine द्वारा तैयार किया गया है, एक गहरे ज्योतिषीय मार्गदर्शक का दर्शन है। वेदीय परंपराओं में निहित इस पंचांग में तिथि (चंद्रमा का दिन), नक्षत्र (नक्षत्र), योग और करण जैसे महत्वपूर्ण तत्वों को शामिल किया गया है। New Delhi, Delhi, IN के विशेष ऊर्जा के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया यह पंचांग हिन्दू परंपराओं का पालन करने वाले व्यक्तियों के लिए एक अमूल्य साधन है। शुभ और अशुभ समयों के सटीक इंजन मिलाकर, यह दैनिक पंचांग दैहिक गतिविधियों, धार्मिक कार्यों और सांस्कृतिक घटनाओं की योजना बनाने के लिए एक विश्वसनीय साथी बन जाता है। एस्ट्रोलॉजी डिवाइन सुनिश्चित करता है कि New Delhi, Delhi, IN में रविवार, 22 मार्च 2026 को एक आध्यात्मिक और समर्थ प्रवृत्ति हो।
| सूर्य राशि | |
| चंद्र राशि | |
| अयाना | उत्तरायण हर साल ‘मकर संक्रांति’ से शुरू होने वाला यह चरण उत्तर की ओर सूर्य की गति का प्रतीक है। इस अत्यंत शुभ अंतराल के दौरान, दिन के घंटे (दिनमान) लगातार बढ़ते हैं जबकि रात के घंटे (रात्रिमान) घटते हैं। सूर्योदय की दिशा दक्षिण-पूर्व से उत्तर-पूर्व की ओर स्थानांतरित हो जाती है। इस अवधि में शिशिर (शीत), वसंत और ग्रीष्म (गर्मी) की ऋतुएं शामिल हैं, जिनमें से प्रत्येक दो महीने तक चलती है। |
| ऋतू | वसंत |
| दिनमान / रात्रिमान | 12:10:22 / 11:48:28 |
| मध्याह्न (सौर दोपहर) | 12:28 PM |
| तिथि | चतुर्थी शुक्ल Paksha 09:17 PM तक देवता: यम • प्रकृति: रिक्ता • अगली तिथि: पंचमी (शुक्ल) |
| नक्षत्र | भरणी Pad 2 10:42 PM तक देवता: यम (मृत्यु/परिवर्तन के देवता) • स्वामी: शुक्र (अग्नि) • अगला नक्षत्र: कृत्तिका |
| योग | वैधृति 03:41 PM तक कम सहारा — चालाक और शक्तिशाली स्वभाव। • अगला योग: विष्कंभ |
| करण | वणिज 10:36 AM तक अगला करण: विष्टि |
| वार (दिन) | रविवार (रविवार) |
| विक्रम संवती | 2082 कालयुक्ति स्वामी: केतु • इस संवत्सर का व्यक्ति कलाप्रिय होगा, महान मित्र होगा, यश अर्जित करेगा, दीर्घायु और धनवान हो सकता है। कुछ रोगों से भी पीड़ित हो सकता है। |
| शक संवती | 1947 विश्वावसु स्वामी: राहु • इस वर्ष जन्मे व्यक्ति विलासितापूर्ण जीवन जिएंगे, जीवन की सर्वोत्तम वस्तुएँ चुनेंगे। वे संतुलित स्वभाव और अच्छे चरित्र वाले होंगे। |
| गुजराती संवत | 2081 पिंगल स्वामी: राहु |
| कलि संवत / कलियुग | 5126 |
| पूर्णिमांत / अमांता | चैत्र / चैत्र |
| प्रविष्टे (सौर दिवस) | 8 |
| लाहिड़ी अयनांश | 24.230093° |
| अभिजीत मुहूर्त | 12:04 PM – 12:52 PM |
| ब्रह्म मुहूर्त | 04:48 AM – 05:36 AM |
| विजय मुहूर्त | 02:30 PM – 03:18 PM |
| गोधूलि मुहूर्त | 06:33 PM – 06:57 PM |
| अमृत काल | 06:17 PM – 07:46 PM |
| निशीथ काल (मध्यरात्रि) | 12:04 AM – 12:51 AM (अगले दिन) |
| प्रातः संध्या | 05:12 AM – 06:23 AM |
| सायं संध्या | 06:33 PM – 07:44 PM |
| राहु काल | 05:02 PM – 06:33 PM |
| यमगण्ड काल | 12:28 PM – 01:59 PM |
| गुलिक काल | 03:31 PM – 05:02 PM |
| दूर मुहूर्त | 04:56 PM – 05:45 PM |
| कुलीक काल | 01:41 PM – 02:30 PM |
| कंटक काल | 07:12 AM – 08:00 AM |
| कालवेला काल | 08:49 AM – 09:38 AM |
| वर्ज्यम् | 09:27 AM – 10:56 AM |
| अग्निवास (हवन/यज्ञ) | पाताल में धननाश (आर्थिक हानि) अग्नि का वास पाताल में है। हवन के लिए त्याज्य / अशुभ। |
| शिववास (रुद्राभिषेक) | कैलाश पर सौख्य (सुख एवं आनंद) भगवान शिव कैलाश पर्वत पर विराजमान हैं। रुद्राभिषेक के लिए अत्यंत शुभ फलदायी। |
| दिशा शूल | पश्चिम उपाय: यात्रा से पूर्व पान या घी का सेवन करें |
| होमाहुति ग्रह | सूर्य (☉) |
| चंद्र निवास | पूर्वराहु वास: उत्तर |
| आनंददी योग | कालदंड मृत्यु का संकेत (मृत्यु) |
| कलियुग वर्ष | 5127 वर्ष |
| कलि अहर्गण | 1872656 दिन |
| राष्ट्रीय सौर दिनांक | 🇮🇳चैत्र 01, 1948 शक |
| राष्ट्रीय निरयण दिनांक | 🇮🇳चैत्र 10, 1947 शक |
| लाहिड़ी अयनांश | 24.230093° |
| Rata Die | 739697 |
| जूलियन दिनांक | मार्च 09, 2026 ईस्वी |
| जूलियन दिवस / MJD | 2461121.5 Days / 61121 Days |
सूर्योदय कालीन आकाशीय ग्रह स्थिति एवं लग्न चक्र
| ग्रह | राशि | अंश | नक्षत्र (पद) | गति |
|---|---|---|---|---|
| सूर्य | | 07° 11' | उत्तर भाद्रपद पद 2 | मार्गी (D) |
| चंद्र | | 16° 48' | भरणी पद 2 | मार्गी (D) |
| मंगल | | 21° 04' | पूर्व भाद्रपद पद 1 | मार्गी (D) |
| बुध | | 14° 20' | शतभिषा पद 3 | मार्गी (D) |
| गुरु | | 21° 03' | पुनर्वसु पद 1 | मार्गी (D) |
| शुक्र | | 25° 07' | रेवती पद 3 | मार्गी (D) |
| शनि | | 10° 04' | उत्तर भाद्रपद पद 3 | मार्गी (D) |
| राहु | | 13° 42' | शतभिषा पद 3 | वक्री (R) |
| केतु | | 13° 42' | पूर्वा फाल्गुनी पद 1 | वक्री (R) |
| लग्न | | 05° 45' | उत्तर भाद्रपद पद 1 | मार्गी (D) |
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संस्कृत शब्द पंचांग दो शब्दों से बना है: पंच (पांच) + अंग (तत्व या भाग)। अपने शुभ कार्यों व दैनिक गतिविधियों को इन खगोलीय ऊर्जाओं के साथ जोड़ना सफलता, मानसिक शांति और समृद्धि लाता है।
सूर्य और चंद्रमा के मध्य 12° की कोणीय दूरी को एक तिथि कहा जाता है। एक चंद्र मास में कुल 30 तिथियां होती हैं, जो शुक्ल पक्ष (बढ़ता चंद्रमा) और कृष्ण पक्ष (घटता चंद्रमा) में 15-15 तिथियों में विभाजित होती हैं। तिथि कार्य की भावनात्मक ऊर्जा तय करती है।
आकाश मंडल 13°20' के 27 नक्षत्रों में विभाजित है। किसी समय विशेष पर चंद्रमा जिस नक्षत्र में गोचर कर रहा होता है, वह उस समय की मानसिक वृत्ति, यात्रा, विवाह और महत्वपूर्ण कार्यों के फल को सबसे अधिक प्रभावित करता है।
सूर्य और चंद्रमा के निरयण देशांतर के जोड़ को 27 भागों में बांटने से 27 योग बनते हैं। सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग, और रवि योग जैसे शुभ योग सभी दोषों को शांत कर कार्यों में निश्चित सफलता दिलाते हैं।
एक तिथि के आधे भाग (6° दूरी) को करण कहा जाता है। कुल 11 करण होते हैं (4 स्थिर और 7 चर)। करण सूक्ष्म समय-खंड होता है जो व्यापार, आर्थिक निवेश, यात्रा और निर्माण कार्यों का सटीक मुहूर्त तय करता है।
स्थानीय सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक की अवधि 'वार' कहलाती है। प्रत्येक वार के अधिष्ठाता ग्रह होते हैं (रविवार-सूर्य, सोमवार-चंद्र, मंगलवार-मंगल, बुधवार-बुध, गुरुवार-गुरु, शुक्रवार-शुक्र, शनिवार-शनि)।
प्रतिदिन लगभग 90 मिनट की अवधि छाया ग्रह राहु के आधिपत्य में होती है। नया व्यवसाय शुरू करना, अनुबंध पर हस्ताक्षर, विवाह, गृह प्रवेश या वाहन खरीद जैसे मांगलिक कार्य राहुकाल में करने से विघ्न आने की संभावना रहती है।
हिन्दू पंचांग, शुभ मुहूर्त, राहुकाल और ज्योतिषीय गणना से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न व उत्तर।
प्रत्येक स्थान के सटीक अक्षांश (Latitude) व देशांतर (Longitude) अनुसार स्थानीय सूर्योदय, सूर्यास्त, तिथि व शुभ मुहूर्त।